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बुधवार, 30 दिसंबर 2020

Sharirik durbalta samsya or samadhan \ शारीरिक दुर्बलता समस्या और समाधान

 Kyo hoti hai Sharirik durbalta ?

क्यों होती है शारीरिक दुर्बलता ?

 
अनेक समस्याओं के साथ-साथ शारीरिक दुर्बलता जैसी समस्याएं भी कभी-कभी परेशानी का कारण बन जाती है। किशोरावस्था से प्रारम्भ हुई यह समस्याएं वृद्धावस्था तक व्यक्ति के साथ किसी न किसी रूप स जुड़ी रहती है।  शारारिक क्षमता के अनुसार व्यक्ति शारीरिक सम्बन्धों द्वारा आनन्द प्राप्त करता है, वंशवृद्धि का अपना उत्तरदायित्व पूरा करता है। इन कार्यों में यदि कोई बाधा नहीं आती है तो व्यक्ति अन्य ढेरों समस्याओं के होते हए भी प्रसन्न रहता है। सभी समस्याओं सामना करता है। लेकिन यदि किसी कारण से उसकी यौन क्षमता प्रभावित होती है तो वह शारीरिक एवं मानसिक रूप से परेशानी से घिर जाता है। अंतरंग जीवन से सम्बन्धित अनेक समस्याएँ हैं, परंतु जीवन में यौन दुर्बलता की समस्या एक ऐसी समस्या है जिसका समाधान आवश्यक ही नहीं अति आवश्यक है। अन्यथा जीवन नीरस, निस्सार, आत्मग्लानि से परिपूर्ण एवं उत्साहरहित प्रतीत होने लगता है।
यौन दुर्बलता की समस्या प्रौढ़ावस्था एवं वृद्धावस्था में ही नहीं वरन युवावस्था में भी दिनों-दिन बढ़ती जा रही है।

 यह समस्या उत्तरोत्तर उग्र रूप धारण करती जा रही है। जिसके प्रमुख कारण इस प्रकार हो सकते हैं - 


1.    सब्जियाँ, दूध, मक्खन, घृत, तक्र (छाछ) आदि की कमी एवं उनके सेवन में कठिनाई होने लगी।
2.    शारीरिक श्रम का अभाव होता जा रहा है।
3.    टी.वी. के अश्लील दृश्यों का प्रभाव चरित्रहनन की ओर प्रेरित कर रहा है एवं किशोर अवस्था से ही ब्रह्मचर्य व्रत का खण्डन हो रहा है।
4.    चाय, जर्दा, गुटखा एवं नशीली मादक वस्तुओं का प्रचलन छोटी आयु के बच्चों एवं छात्रों में बढ़ता जा रहा है।
5.    सम्मिलित परिवार का विघटन एवं एकाकी जीवन की युवकों में प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है।
   6.कुपोषण, चटपटे, गरिष्ठ, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का सेवन भी एक कारण है।
  7 स्वास्थ्य के नियमों की अवहेलना, यथा अधिक रात्रि तक जागना तथा सुबह आठ-नौ बजे तक सोते रहना आदि ।
  8. पर्यावरण में प्रदूषण तथा अधिकतर मीठे द्रव्यों के सेवन से मधुमेह आदि रोगों के दुष्प्रभाव के कारण। 


प्रौढावस्था एवं वृद्धावस्था में पुरुषों में यौन दुर्बलता समस्या के निम्न प्रमुख कारण हो सकते है-
1.  सहवास की अधिकता के कारण।
2. युवावस्था से ही वृष्य, वाजीकरण, रसायन, पौष्टिक, वीर्यवर्धक, वृहण, पुष्टिकर,  अग्निवर्धक, कब्जनाशक द्रव्यों का सम्यक रूप से सेवन नहीं करना।
3. युवावस्था में वर्णित कारण भी सहायक हैं।

कारण कुछ भी रहे हों, प्रश्न उठता है समाधान का । कुछ सुलभ समाधान इस प्रकार है-


यदि अधिक धातुक्षीणता के कारण समस्या उत्पन्न हुई है तो निम्न प्रयोग करें - असंगथ, शतावर, गिलोय, विदारीकंद, गोखरू, खरेंटी, कौंचवीज, सफेद मूसली, काली मूसली, मुलहठी, अष्टवर्ग की औषधियां, सोंठ, कालीमिर्च, पीपल, छोटी इलायची, लौग, जायफल, जावित्री, दालचीनी, तेजपत्र समभाग लेकर चूर्ण करें। 10 ग्राम की मात्रा में समभाग मिश्री और गो घृत मिलाकर गो दूध के साथ प्रातः भोजन से पूर्व सेवन करें। अचार एवं खट्टे द्रव्यों का परित्याग करें। शक्ति संग्रहण हेतु पके हुए मीठे आम का सेवन करें। दुग्ध पीयें। पका हुआ केला। खायें, रुचि एवं सामर्थ्य अनुसार मौसमी फलों, सूखे मेवों यथा बादाम, पिस्ता, चिलगोजा, अखरोट, मुनक्का, काजू एवं चिरोंजी आदि का प्रयोग लाभप्रद है।


आयुवृद्धि हेतु रसायन द्रव्यों यथा हरड़, रसौत, बापचि, लहसुन, आंवला, पीपल, गुग्गल, गिलोय, विदारीकंद, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, जटामांसी आदि का सेवन हितकर है। सब्जियाँ बथुआ, पालक, कटहल, पोई, लौकी, तुरई, छछिन्डा, रेशेदार सब्जियाँ एवं हरी सब्जियाँ लाभदायक हैं। दुग्ध - गोदुग्ध, गोघृत, मक्खन एवं तक्र (छाछ) का प्रयोग अग्नि एवं बलाबल अनुसार प्रयोग करें और यौन दुर्बलता से मुक्ति पायें ।


भोजन में प्रतिदिन अंकुरित गेहूं, चना, मसूर, मंूग आदि का पाचन शक्ति के अनुसार सेवन करने से यौन दुर्बलता की समस्या दूर होती है। भोजन ताजा एवं सुपाच्य होना चाहिए। 


कोल्ड ड्रिक यथा कोकाकोला, थम्सअप, केम्पाकोला आदि हानिप्रद हैं। भोजन से पूर्व चटनी के रूप अदरक, नींबू, कालीमिर्च, पोदीना, काला नमक, भुना हुआ जीरा और मुनक्का डालकर प्रयोग कर भोजन के पश्चात् तक्र अर्थात छाछ का सेवन करें। तक्र में भुना हुआ जीरा, पोदीना, काला नमक, काला एवं घृत में सिकी हुई हींग का प्रयोग करें। इससे पाचन शक्ति सबल बनी रहती है एव रस, मांस, मज्जा, मेद, अस्थि एवं वीर्य पुष्ट बने रहते हैं।


इस प्रकार यह सुलभ उपाय आपको शारीरिक दुर्बलता से छुटकारा दिला सकता है और आपका वैवाहिक जीवन सुख और आन्नदमय हो सकता है। सुखी जीवन की हार्दिक शुभकामनाएं।

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