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गुरुवार, 7 जनवरी 2021

Adrak ke fayde / अदरक के फायदे

 Adrak ke fayde

 

अदरक के फायदे


अदरक प्रायः दाल, साग-सब्जी, दूध, चाय, काफी और चटनी में इस्तेमाल होता है। सूख जाने पर यह सोंठ कहलाता है। सूखने पर भी इसके गुणों में रत्ती भर भी कमी नहीं आती।  अनेक रोगों में इसका उपयोग निम्नलिखित ढंग से किया जाता है-


खांसी- दमा- 

 साठ ग्राम अदरक के रस में साठ ग्राम मधु मिलाकर तनिक गर्म करके पी लें । सात दिन में आराम होगा।


भूख न लगना-

भूख ठीक तरह न लगती हो, पेट में वायु भर जाती हो, कब्ज रहती हो तो अदरक को काट कर बहुत वारीक टुकडे कीजिये और नमक छिड़क कर एक दो ग्राम खाए। भूख अच्छी तरह लगेगी, वायु का निकास होगा और कब्ज खुलेगी।


पाचनवर्द्धक चूर्ण- 

पाचन विकार ठीक करता है, मदाग्नि बढाता है, वायु पीडा और खट्टी डकारों में लाभदायक है। सोठ और अजवायन आवश्ययकतानुसार नीबू के इतने रस में डालें कि दोनो चीजें तर हो जाए। इसे छंाव मे खुश्क करके पीस लें और थोड़ा-सा नमक मिलाकर सुरक्षित रखें। दोनो समय चार रत्ती से एक ग्राम तक पानी के साथ सेवन करें।


कान-दर्द- 

अदरक का रस पांच ग्राम, मधु दो ग्राम, सेंधा नमक एक रत्ती, तिल्ली का तेल दो ग्राम। पहले नमक और अदरक का रस मिला लें। फिर सब मिलाकर अच्छी तरह हिलाए । थोडा गर्म करके सात-आठ वूंद कान में डालें, कान का दर्द बंद होगा।


इंफ्लुएजा- 

सोंठ  चूर्ण पचास ग्राम, चूर्ण पिपली पच्चीस ग्राम और चूर्ण काकटा सीगी डेढ-सौ ग्राम-् सब मिला लें। इफ्लुएजा की खंासी को रोकने के लिए एक से दो ग्राम तक यह चूर्ण थोडे मधु के साथ चटाए ।


आवाज बैठना--

 अदरक का रस मधु में मिलाकर चाटना चाहिए। 


नजला-जुकाम-

 अदरक छीलकर बारीक-बारीक काट लें और कडाही मे घी डालकर इसमे भूनें। तत्पश्चात् अदरक को बराबर वजन की चाशनी में डालें और पकाए । जब खूब पक जाए तो सोठ, सफेद जीरा, काली मिर्च, नाग केसर, जावित्री, बडी इलायची, तज, पतरज, पीपल, बनिया, काला जीरा, पीपलामोल और वावटिंग-प्रत्येक अदरक का बारहवां भाग लेकर कूट-छानकर मिलाए ।

सेवन-विधि- आठ ग्राम से लेकर पन्द्रह ग्राम तक सेवन करें। जुकाम व नजले में गुणकारी है । ठण्ड के कारण आवाज बैठ जाए तो इसे खोलती है, दम फूलने की शिकायत इसके सेवन से दूर हो जाती है, भूख खूब लगती है, पेट के दर्द और वायु के लिए लाभकारी है।


पसली का दर्द-

सोंठ तीस ग्राम मोटी-मोटी कूटकर तिहाई किलो पानी में आधे घंटे तक पकाए और छान लें। तीस-तीस ग्राम यह काढा तीन तीन घंटे पश्चात् चार बार पिलाए पसली के दर्द का यह सास इलाज है।
संग्रहणी, मरोड, बदहजमी-चूर्ण सोठ पचास ग्राम, चूर्ण सौंफ पचास ग्राम, चूर्ण हरड पचास ग्राम, चीनी पिसी हुई डेढ सौ ग्राम ।


बदहजमी के दस्त, संग्रहणी, मरोड और पाचन की कमजोरी मे एक से तीन ग्राम तक दिन में दो बार दें।


इस प्रकार सामान्य सी दिखने वाली अदरक के इतने मूल्यवान गुण है। जिसकी कोई सीमा नहीं है। जीवन के लगभग प्रत्येक छोेटे रोग से लेकर प्राण लेने वाले बडे - बडे रोग अदरक द्वारा ठीक किये जा सकते है। इसलिये डाक्टरों के बडे बडे खर्चों से बचकर घर में अदरक का प्रयोग कीजिये और अपने परिवार को स्वस्थ रखिये।  
 

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