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मंगलवार, 26 जनवरी 2021

Ang ke dhilepan or shigrhapatan se rahat dilate hai konch ke beej / अंग के ढीलेपन और शीघ्रपतन से राहत दिलाते है कौंच के बीज

Ang ke dhilepan or shigrhapatan se rahat dilate hai konch ke beej 

 

 

अंग के ढीलेपन और शीघ्रपतन से राहत दिलाते है कौंच के बीज


कौंच के बीजों को वानरी, आत्मगुप्त, कपिकच्छू और केवांच आदि नामों से भी जाना जाता है। यह लता जाति की वनस्पति है। इस पर बहुत ही सूक्ष्म रोम होते है। यह वर्षा के बाद उत्पन्न होती है। यह गांव के बाहर बागों में और जंगलों में किसी झाडी या वृक्ष पर फैली होती है। इसके सूक्ष्म रोमों के कारण इसके मनुष्य के शरीर पर छूने से खुजली और जलन होने लगती है। खुजली के साथ दाह और शोध भी होने लगता है। इसमें सेम के आकार की फली लगती है। जिसमें पांच से छः काले और चमकीले रंग के बीज लगते है। इसकी बाहरी काली परत को हटा दिया जाता है और अंदर के सफेद बीजों का उपयोग किया जाता है। इसे ताकत के रूप में लिया जाता है। कौंच के पौधे के सभी भागों में औषधीय गुण होते है। इस की पत्तियों, बीजों और शाखाओं का उपयोग दवा के रूप में किया जाता है।

 ज्यादातर कौंच का उपयोग लंबे समय तक संभोग करने की क्षमता प्राप्त करने के लिये किया जाता है।
प्रमुख रूप से पुरूषों के यौन अंग की शिथिलता, वीर्य का पतला होना, शीघ्रपतन की समस्या को दूर करने के लिये इसका प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेद में इसे यौन क्षमता बढाने वाली दवा के रूप में मुख्य रूप से ग्रहण किया जाता है। इसके अलावा मांसपेशियों में खिंचाव, गैस, दस्त, खांसी, गठिया, दर्द, शुगर, टीबी तथा मासिक धर्म की परेशानी में भी कौंच के बीजों का उपयोग किया जाता है। तनाव, चिंता, तंत्रिका तंत्र की परेशानी, पार्किसंस रोग, कोलेस्टोल, तथा ब्लडशुगर के रोगों में भी कौंच के बीजों का उपयोग किया जाता है। मानसिक सुदृढता के लिये यह प्रमुख औषधी है। 


कौंच बीज के यौन संबंधी फायदेः-

यह एक बहुत अच्छा कामोद्दिपक है। यह जनन अंगों की शिथिलता दूर करके उनमें उत्तेजना पैदा करता है। उनके उत्तक तत्वों को सवंर्द्धित करता है। पुरूषों में शुक्राणुओं को बढाता है तथा गर्भवती महिलाओं में दूध को बढाता है। वक्ष स्थल को कठोर, सुदृढ और मजबूत बनाता है। उनका आकार बढाता है। स्त्री की ढीली योनि की मांसपेशियों में कसावट लाकर उसे छोटी करता है। कमजोरी और अक्षमता को दूर करता है। तंत्रिकाओं को शांत करता है। संभोग शक्ति को बढाने के लिये इसके बीजों का पाउडर बनाकर उपयोग किया जाता है। इससे वीर्य वृद्धि होती है और संभोग की इच्छा बढाती है। यौनांग का ढीलापन दूर होता है। इसके साथ ही शीघ्रपतन रोग का निवारण होता है। 


सावधानीः-

कौंच के बीजों का उपयोग करने के दौरान तेज मिर्च मसाले और तली हुई व खट्टी चीजों से परहेज करना चाहिये। इनका सेवन नहीं करना चाहिये। 


प्रयोग का तरीकाः-

इसके बीजों को पीसकर पाउडर बना लें और दूध में चीनी के साथ पकाकर खीर बनाकर सेवन करे। इसके बीजों को दूध या पानी में उबालकर उनका छिलका हटाकर इनको सुखा देना चाहिये। सूखने के बाद पीसकर बारीक चूर्ण बना लेना चाहिये। इस चूर्ण का लगभग पांच - पांच ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम मिश्री के साथ दूध में मिलाकर सेवन करना चाहिये। 


सौ ग्राम कौंच के बीज और सौ ग्राम तालमखाना को कूटपीसकर चूर्ण बना ले। फिर इसमें दो सौ ग्राम मिश्री पीसकर मिला लें। हल्के गर्म दूध में आधा चम्मच चूर्ण मिलाकर रोजाना पीना चाहिये। दूध व चीनी के साथ इसे काढे के रूप में भी लिया जा सकता है। 


शीघ्रपतन और वीर्य की कमी जैसी समस्याओं में कौंच के बीज, सफेद मूसली, और अश्वगंधा के बीजों को समान मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बना ले। इस चूर्ण की एक चम्मच मात्रा सुबह और शाम एक कप दूध के साथ लेना चाहिये।
 

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