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सोमवार, 18 जनवरी 2021

Ashva ki shakti deti ashvagandha. Ajmaye is tarah \ अश्व की शक्ति देती अश्वगंधा। आजमाएं इस तरह

 Ashva ki shakti deti ashvagandha. Ajmaye is tarah

 
 
 

अश्व की शक्ति देती अश्वगंधा। आजमाएं इस तरह


अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक औषधि है। जो घोडे के समान शक्ति देने वाली मानी जाती है। इसे अश्वगंधा का शाब्दिक अर्थ है घोडे की गंध। इसकी ताजा पत्तियों तथा जडों में घोडे के मूत्र की गंध आने के कारण ही इसका नाम अश्वगंधा पडा। वैश्विक स्तर पर प्रयोग की जाने वाली यह औषधि है। 

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भारत में अश्वगंधा का उत्पादन राजस्थान और मध्यप्रदेश में सूखी भूमि पर किया जाता है। राजस्थान के नागौर की अश्वगंधा सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। चीन तथा कोरिया में भी इसका उत्पादन होता है। यह एक आधारभूत जडी बूटी है। आयुर्वेदिक दवा अश्वगंधादि लेह और अश्वगंधारिष्ट में यह प्रमुख रूप से पाई जाती है। 


अश्वगंधा शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढाती है। रक्तचाप सही रखता है। तनाव कम होता है। कोलेस्ट्रोल को घटाती है। पाचन क्रिया सही रखती है। नींद अच्छी आती है। टीबी अर्थात तपेदिक के रोग में आराम देती है। जडों के पाउडर का प्रयोग खांसी और अस्थमा को दूर करने के लिये भी किया जाता है। जडों को त्वचा संबंधी रोगों के निदान हेतु भी प्रयोग किया जाता है। इसमें एंटी ट्यूमर और एंटी बायोटिक गुण भी पाया जाता है। तंत्रिका तंत्र संबंधी कमजोरी को भी दूर करने के लिये इसका उपयोग किया जाता है। गठिया और जोडों के दर्द को ठीक करने के लिये भी इसका प्रयोग किया जाता है। 

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अश्वगंधा के यौन जीवन में लाभः-
यह शरीर की उत्कंठा, बेचैनी व घबराहट को शांत करती है। शरीर की गं्रथीय ओर यौन कार्यप्रणाली, दमखम और उर्जा को पुनर्जीवित करती है। आयुर्वेद में इसे पुरूषों के लिये जीवनभर उपयोग करने का सुझाव दिया जाता है। यौन क्षमता बढाने के साथ ही शुक्राणुओं की संख्या भी बढाती है। इसकी जड शक्तिवर्धक, शुक्राणुवर्धक, तथा शरीर को पुष्ट करने वाली होती है। शरीर को बलवान बनाती है। इससे आलस्य नहीं रहता। संबंध बनाने के दौरान थकान नहीं होती। स्त्री रोग जैसे श्वेत प्रदर, अधिक रक्तस्त्राव, गर्भपात आदि में लाभकारी है। स्त्रियों की प्रजनन क्षमता बढाती है। शरीर में आयरन की कमी को पूरा करती है। 

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उपयोग के दौरान सावधानियांः-
अश्वगंधा के अधिक सेवन से पेट में गैस, दस्त आदि की समस्या हो सकती है। आंतों को नुकसान हो सकता है। अधिक सेवन से नींद ज्यादा आती है। सीमा से अधिक सेवन करने से नींद आनी बंद हो जाती है। इसलिये अश्वगंधा का सेवन एक निश्चित सीमा तक करना चाहिये। 

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यदि किसी अन्य रोग की दवा ले रहे है तो फिर अश्वगंधा का सेवन नहीं करना चाहिये। क्योंकि अश्वगंधा फिर शरीर में अन्य किसी दवा को लगने नहीं देती है। इससे शरीर का तापमान बढता है। ज्यादा सेवन से बुखार होने की समस्या हो सकती है। इसलिये इसे गर्मी में नहीं लेना चाहिये। 

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प्रयोग का तरीकाः-
घोडे जैसी शक्ति प्राप्त करने के लिये अश्वगंधा की जड के पाउडर का प्रयोग किया जाता है। इसके पाउडर का एक चम्मच रोजाना गर्म दूध के साथ लेना चाहिये। अश्वगंधा चूर्ण तथा बिदारीकंद को सौ सौ ग्राम की मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना ले। चूर्ण को गर्म दूध के साथ लेना चाहिये। इससे वीर्य ताकतवर बनता है तथा शीघ्रपतन की समस्या से निजात मिलती है।
 

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