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शनिवार, 2 जनवरी 2021

Lal mirch ek, rognash anek \ लाल मिर्च एक, रोगनाश अनेक

 Lal mirch ek, rognash anek 



लाल मिर्च एक, रोगनाश अनेक


कोई भी वस्तु हो, उसमें दोष के साथ गुण भी विद्यमान होते है। किसी अच्छी वस्तु को भी यदि अनुचित रूप से प्रयोग किया जाये तो वह भी हानि दे सकती है। तथा बेकार वस्तु को भी यदि सकारात्मक रूप से प्रयोग किया जाये तो वह भी लाभकारी सिद्ध हो सकती है। मिर्च पर भी यही बात सिद्ध होती है। 


कोई रोग और कष्ट हो, इसका परहेज बतलाते समय सुर्ख मिर्च का नाम सर्वप्रथम लिया जाता है। परन्तु इतनी बदनाम होने पर भी मिर्च खाने का प्रचार दिनों-दिन बढ रहा है। भारत के कई भाग तो ऐसे हैं कि वहाँ के लोग विना मिर्च के अपना जीवन ही कष्टदायक समझते हैं। यदि कोई ऐसा व्यक्ति, जो मिर्च खाने का आदी न हो, दक्षिण भारत की ओर चला जाए तो मिर्चों के कारण उसकी जान पर आ बनती है। राजपूताना, मारवाड और उत्तर प्रदेश में भी मिर्च का भरसक उपयोग होता है।


संक्षेप में मिर्च के निम्नलिखित उपयोग भी किए जा सकते हैं -


एक अनोखी औषधि- बीज निकाली हुई सुर्ख मिर्च का चूर्ण पन्द्रह -ग्राम, रेक्टीफाइड स्पिरिट 450 ग्राम, दोनो को मिलाकर शीशी में मजबूती से कार्क लगाकर रखें। प्रतिदिन शीशी को हिला दिया करें। पन्द्रह दिन के पश्चात् स्पिरिट को छान कर रख दें, मैला फेंक दें। रामबाण दवा तैयार हो गई । इसका गुणधर्म निम्नलिखित है -


(1) हैजे के रोगी को दम-दम बूंद एक-एक चम्मच पानी में मिलाकर जब तक आराम न आए, तब तक आधे आधे घंटे पश्चात् पिलाए। 99 प्रतिशत रामवाण है।


(2) जिन लोगो को आवश्यकता से अधिक नीद आती हो, उनको पांच पांच बूंद प्रात व सायं पानी मे पिलाएँ ।


(3) बलगमी खांसी मे रोगी को कुनकने जल मे पांच-पांच बून्द मिलाकर दिन में तीन वार पिलाए, अमृत से कम नही

 
(4) बदहजमी और भूख की कमी में पांच-पांच वूंद दोनो समय भोजन ने पहले थोडे पानी मे मिलाकर पिलाएँ।


(5) पचहत्तर ग्राम गर्म जल में दस बूंद मिलाकर पिलाने से अफारा दूर होता है।


(6)  मिर्गी, हिस्टीरिया और पागलपन के दौरे में तथा बेहोशी में इसकी कुछ बूंदे नाक कान में टपकाने से तुरंत होश आता है। यह दवाई जोरदार लेकिन हानिरहित है। जब तमाम दवायें बेकार हो जाये तो यह छोटी सी मिर्च काम कर जाती है। 


(7)  हृदय की धडकन धीमी पड गई हो, नाडी कमजोर हो, हाथ-पांव ठण्डे हो रहे हो-ऐसी अवस्था मे, कारण चाहे हैंजा हो या कोई और रोग, पन्द्रह बूंद, चालीस ग्राम बढिया शराब में मिलाकर पिलाएं।

(8 ) कान-दर्द- तेल तिल पचास ग्राम लोहे की कलछी में डालकर आंच पर रखें, जब तेल पकने लगे तो इसमे एक सुर्ख मिर्च डाल दें और इसके काला-सा हो जाने पर छान कर शीशी मे रख लें। आवश्यकता के समय इस तेल को गर्म करके कुछ बूंदे कान मे डालें, दर्द तुरन्त बन्द हो जाएगा।


(9 ) दंत-पीडा- यदि दाढ में बहुत दर्द हो रहा हो और किसी इलाज से वन्द न होता हो तो एक खूब पकी हुई लाल मीर्च लेकर उसके ऊपर का डठन और अन्दर के वीज निकाल कर अलग करें और वाकी का भाग पानी के साथ पीस कर कपडे मे दबाकर रस निकाल लें। इस रस को जिस ओर की दाढ दुखती हो उम ओर के कान में दो-तीन बूंद टपका देने से दाढ का दर्द तुरन्त दूर हो जाता है । मिर्च का रस कान मे डालने से थोडी देर तक जलन होती है। यदि यह जलन पसन्द न हो तो थोडी-सी शक्कर पानी में डालकर इसकी दो-तीन बून्द कान मे टपकाने से जलन मिट जाती है ।

(10 ) आधे सिर का दर्द- सात सुर्ख मिर्च लेकर उवलते हुए 150 ग्राम घी मे डालकर जलाएँ । माथे और कनपट्टियो पर इस तेल की मालिश करें। आधेसिर के दर्द के लिए रामबाण है-्-कान मे दर्द हो, इस तेल की एक बंूद डालने से दर्द भाग जाता है।


(11 ) वुखार --सुर्ख मिर्च और कुनीन बरावर वजन पानी मे खरल करें और चने के वरावर गोलियां बना लें । ज्वर आने से एक घंटा पहले एक-दो गोली पानी के साथ सेवन कराने से बुखार नहीं होता। यदि आवश्यकता पडे तो दूसरी बार इसी प्रकार दें।

(13 ) दस्त-मरोड- लाल मिर्च, हींग और कपूर वरावर वजन पीस कर एक-एक रत्ती की गोलियाँ बना कर सुखा लें। दस्त-मरोड की हालत मे एक से तीन गोली तक प्रतिदिन खाने से आराम मिलता है।
विषैला डंक- पानी के साथ सुर्ख मिर्च पीस कर बिच्छू के काटे स्थान पर लगाने से विष दूर हो जाता है। पागल कुत्ते के काटे स्थान पर लेप करने से आराम आ जाता है।


(14 ) हैजा- हैजे के रोग मे भी सुर्ख मिर्च आश्चर्यजनक प्रभाव दिखाती है । लाल मिर्च के बीज निकाल कर इसखे छिलकों को खूब बारीक पीस कर कपडछन करें। इस चूर्ण को मधु (शहद) के साथ घोट कर दो-दो रत्ती की गोलियां बना कर छाँव मे सुखाएँ । हैजे के रोगी को बिना किसी अनुपान के एक गोली वैसे ही निगलवा देनी चाहिए। जिस रोगी का शरीर ठण्डा पड गया हो, नाडी डूवती जा रही हो, ठण्डा पसीना चल रहा हो, इससे शरीर मे दस मिनट में ठण्डा पसीना बन्द होकर गर्मी पैदा होने लगती है और नाडी अपनी साधारण गति पर आ जाती है ।


हैजे की गोली- शुद्ध अफीम आधा ग्रेन, वीज सहित सुर्ख मिर्च एक ग्रेन और हीग दो ग्रेन गोद कीकर के घोल की सहायता से इन सब की एक गोली बना लें । हैजे के रोगी को उस समय सेवन कराएं जब कुछ दस्त हो चुके हो । थोडे-थोडे समय पश्चात् दो-तीन बार ऐसी ही मात्रा देते रहें, परन्तु दिन-भर मे रोगी को और कुछ न खिलाया जाए। यह नुस्खा शत-प्रतिशत लाभदायक है। हैजे की अतिम अवस्था के एक रोगी को, जो कि डॉक्टरी इलाज से निराश हो चुका था, इसकी पहली चुराक ने ही स्वस्थ कर दिया था। ऐसे ही अनेक अवसरो पर यह औपधि रामवाण सिद्ध हुई है।


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