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मंगलवार, 12 जनवरी 2021

Elaychi ke fayde / इलायची के फायदे

 Elaychi ke fayde

 

 

इलायची के फायदे 


इलायची दो प्रकार की होती है। एक छोटी और दूसरी बडी। छोटी इलायची का प्रभाव समशीतोष्ण होता है (अर्थात न अधिक गर्म और न अधिक सर्द )। दिमाग, दिल और शरीर को बल देने वाली है। जी मिचलाना, उल्टी, दमा, खंासी, हिचकी, कफ और कब्ज के लिए गुणकारी है। मूत्र की जलन को दूर करती है, मूत्र को खोलती है, अर्थात मूत्र की कमी को ठीक करती है, मेदे के बेकार क्षरित रस को खुश्क करती है, मन प्रसन्न हो उठना है, फेफडों को बल मिलता है, पथरी की शिकायत को दूर करती है, पान के साथ खाई जाती है। बडी इलायची प्रभाव से गर्म और कुछ कब्ज करने वाली होती है, पसीना लाती है, स्फूर्तिदायक है और छोटी इलायची के गुणों के बराबर है। यह गर्म मसाले में डाली जाती है, दवाई के तौर पर भी उपयोग की जाती है ।


प्यास की तीव्रता- यदि प्यास अधिक लगती हो तो चार किलो पानी मे तीस ग्राम छिलके उबालो। जब पानी लगभग आधा रह जाए तो ठण्डा करके उपयोग में लाए, रामबाण इलाज है ।


पाचनवर्द्धक - इलायची के बीज, सौंफ और जीरा -सब बराबर वजन (पन्द्रह-पन्द्रह ग्राम) तनिक भून लें। भोजन के पश्चात् चम्मच-भर उपयोग करें।
दूसरा योग- इलायची के बीज, सोंठ, लोंग और जीरा- सब पन्द्रह पन्द्रह ग्राम। अगल-अलग पीसकर सबको भली प्रकार मिला लें।


हैजा की रामबाण चिकित्सा- बडी इलाइची, खुश्क पोदीना, खसखस, नागरमोथा।  प्रत्येक पचहत्तर ग्राम। जायफल और लौंग प्रत्येक नब्बे ग्राम।
सबको कूट-पीस कर तीन किलो पानी में उबालें । पानी जब आधा रह जाए तो उतार कर छान लें और किसी मिट्टी के नई बर्तन या तांबे के बर्तन में भर लें। बर्तन का मुंह खुला रहने दें, ताकि भाप निकल कर पानी ठण्डा हो जाए । बर्तन को हर तीसरे दिन किसी खटाई से साफ कर लें। हैजे के रोगी को दिन मे कई वार सेवन कराए ।


शरद् ऋतु की खांसी- दाना वडी इलायची, काली मिर्च, पिपली वड़ी, गिरी वादाम, मुनक्का (वीज निकाल कर) पन्द्रह-पन्द्रह ग्राम। गिरी। वादाम ठण्डे पानी में भिगो कर छिलका उतार दें। अब सब चीजो को कूडी में खूब घोटें, जितना अधिक घोटा जाएगा, दवाई उतनी ही अधिक लाभ करेगी। यदि सख्त हो तो पानी से तर कर सकते हैं। जब गोली बनाने योग्य हो जाए तो जंगली वेर के बराबर गोलियां लें। रात्रि समय एक गोली मुंह में रख कर रस चूसें।


प्रमेह- प्रमेह को दूर करने वाला इससे वढिया नुस्खा आपको शायद ही कही मिलेगा । साधारणत प्रमेह की जितनी भी औषधियाँ हैं उन सवसे कब्ज हो जाती है, और कब्ज की हालत में यह रोग और भी बढ जाता है । परन्तु इस चूर्ण में यह गुुण है कि इसके सेवन से कब्ज विल्कुल नहीं होती। इसके अतिरिक्त यह चूर्ण प्रभाव मे न अधिक गर्म है और न अधिक सर्द । वीर्य की कमी को घटाता और इसके पतलेपन को दूर करता है। इससे सेवन से वीर्य पर्याप्त मात्रा मे पैदा होता है । नुस्खा निम्नलिखित है--
दाना वडी इलायची, दाना छोटी इलायची, असगंध नागोरी, तज कलमी, सालव, तालमखाना- सव वरावर वजन बहुत वारीक पीस लें और कुल वजन - के वरावर मिश्री पीस कर मिलाएं।
सेवन-विधि- नौ ग्राम से बारह ग्राम तक प्रात दूध के साथ उपयोग करें।


मूत्र-जलन और नया सूजाक- सात बादाम गिरी (छिलका रहित), छोटी इलायची सात दाने-आधा किलो पानी में खूब घोंट-छान कर मिश्री मिलाकर दिन में तीन बार पिलाएँ। कुछ दिन में आराम होगा, रामवाण है। यदि इसमें धनिया और सदल का बुरादा प्रत्येक पांच ग्राम मिला लिया जाए तो और भी अधिक गुणकारी है।


हिचकी- दाना वडी इलायची (तनिक भुना हुग्रा ) पांच ग्राम बारीक पीस कर इसमे दो तोले चीनी मिलाएँ। एक-दो वार गर्म पानी के साथ सेवन करने से हिचकी दूर हो जाती है ।

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