Ads

मंगलवार, 5 जनवरी 2021

Haldi ke fayde / हल्दी के फायदे

Haldi ke fayde

 


हल्दी के फायदेः- 


मूत्र की अधिकता - यदि किसी व्यक्ति को बार-बार और अधिक मात्रा में मूत्र आए तथा प्यास अधिक लगे तो इस रोग को वैद्य लोग मधुमेह कहते हैं । इस रोग को दूर करने के लिए हल्दी एक विशेष चीज है। हल्दी बारीक पीसकर रखें । आठ-आठ ग्राम दिन में दो बार पानी के साथ दें। इस साधारण-सी औषधि से पेचीदा और घातक रोगो का इलाज सफलतापूर्वक किया जा सकता है ।

नोट- मधुमेह के रोगी को चीनी से परहेज करना चाहिए, ऐसे रोगी के लिए यह विष के समान है।


कमजोर नजर- नजर की कमजोरी दूर करने के लिए निम्नलिखित नुस्खा अत्यंत गुणकारी है। स्वस्थ व्यक्ति इसे सर्वदा उपयोग करता रहे तो जीवनभर नजर ठीक रहेगी।
हल्दी ढेला (गांठ) तीस ग्राम और कलमी शोरा आठ ग्राम। दोनों को मैदे की तरह वारीक पीस लें और शीशी में मजबूत कार्क लगाकर रखें। प्रात. व साय तीन-तीन सलाई डालना धुन्ध और नजर की कमजोरी के लिए जादू जैसा प्रभाव रखता है । आजमा कर देखिये।
हल्दी को खूब वारीक पीसकर शीशी में सावधानीपूर्वक रखें । रात्रि नमय तीन-तीन सलाइयां डालने से नजर की कमजोरी दूर होगी।


आंख का घाव- यदि किसी कारणवश आंख में घाव हो गया हो तो उनके लिए हल्दी के ढेले को पानी की कुछ बूंदे डालकर पत्थर पर घिसें और सलाई ने आँख में लगाएँ । कुछ समय लगाने से घाव ठीक हो जायेगा।


बेमिसाल टिंकचर- सवा सौ ग्राम हल्दी को पांच सौ ग्राम मेथिलेटिड स्पिरिट में मिलाकर शीशी में डालें और कार्क लगाकर धूप में रख दें। दिन मे दो-तीन बार जोर से हिला दिया करें। तीन दिन पश्चात् छानकर फिर शीशी मे रख लें-यही हल्दी का वेभिसाल टिंकचर है ।


सेवन विधि- दिन में दो-तीन बार सफेद दागो पर लगाएं, सफेद दागों के लिए अत्यन्त हितकर है।
अद्भुत तेल-- पचास ग्राम हल्दी को मोटा-मोटा कूटकर सौ ग्राम पानी में उबालें। फिर पीस-छानकर केवल पानी ले लीजिए। इस पानी के वराबर मीठा तेल मिलाकर धीमी अंाच पर चढाइये। जब पानी जलकर केवल तेल बच रहे तो उतारकर ठण्डा करके शीशी मे भर लें।


सेवन विधि- इम तेल को जरा-सा गर्म करके दो-तीन वूंद कान मंे प्रात व साय डालें। दस-बारह दिन के उपयोग से घाव ठीक होकर पीप का आना वन्द हो जाएगा। यही तेल अन्य घावों पर लगाते रहने से भी घाव अच्छे हो जाते हैं।


ममीरा हल्दी- यदि हल्दी को निम्नलिखित ढंग से तैयार कर लिया जाए तो इसमें वे सभी गुण पैदा हो जाते हैं जो ममीरे में होते हैं । एक गांठ हल्दी लेकर कलईदार वर्तन में डालें। फिर इस पर एक नीबू निचोडें । अब इसे कोयलो की आंच पर रखकर पकाए । जब पानी सूख जाए तो दूसरा नीबू निचोडें और इसे भी सुखा दें। इस प्रकार सात नीबू का रस सुखा दें। बस अब यह हल्दी की गाठ ममीरे के गुणो से युक्त हो गई है।
इसे वारीक पीसकर बराबर वजन काला सुरमा मिलाकर खूब लें, सुरमा तैयार है।
रात्रि समय दो-तीन सलाई डाले । कुछ ही दिनों में धुंध, जाला, तथा रात्रि समय दिखाई न देना आदि रोगों में आराम मिलेगा। 


सुजाक तोड़- हल्दी की गांठ पांच ग्राम लेकर ढाई- सौ ग्राम बकरी के कच्चे दूध में घिसे और तुरन्त सूजाक के रोगी को पिला दें। इस प्रकार प्रतिदिन प्रातः पिलाने से कुछ दिनों में सूजाक की जड़ें कट जाएगी। यह एक हकीम का अत्यन्त गुप्त नुस्खा है।


निगेन्द्रिय में घाव (सूजाक) हो तो आठ-आठ ग्राम बारीक पिसी हुई हल्दी बकरी के दूध की छाछ या पानी के साथ प्रात व साय सेवन करवाएं। रोग की तेजी में दोपहर के समय भी दें ।


हल्दी और आवलों का काढा भी अत्यन्त हितकर है। इस काढे से मूत्र की जलन दूर होकर मूत्र साफ आने लगता है और पेट भी साफ हो जाता है ।


मुंह के छाले- हल्दी पन्द्रह ग्राम कूटकर एक किलो पानी में उवालें, ठण्डा होने पर प्रात व सांय गरारे करें। इससे गले, तालु और जिह्वा के छाले दूर हो जाते हैं।


.कठमाला- बाारीक पिसी हल्दी आठ ग्राम प्रातः पानी के साथ सेवन करवाएं। इसके अतिरिक्त हल्दी की गांठ को पत्थर पर कुछ बूदें पानी डालकर घिसें। जब गाढा-सा लेप तैयार हो जाए तो ऊपर लेप कर दें। कुछ दिनो के निरन्तर उपयोग मे रोग दूर हो जाएगा।


. पेट मे हवा भर जाना- जिस व्यक्ति के पेट में हवा भर गई हो और इस कारण पेट मे अफारा हो रहा हो, उसकी तकलीफ का अनुमान कोई भुगतभोगी ही कर सकता है । ऐसे अवसर पर पिसी हुई हल्दी दस रत्ती और नमक दस रत्ती मिलाकर गर्म पानी से सेवन करवाएँ। इससे हवा निकलकर होकर पेट हल्का हो जाता है। कई दिन तक उपयोग करने से हाजमे की कमजोरी भी दूर हो जाती है


आंख की लाली- चोट लगने से या किसी और कारणवश आँख लाल हो जाए तो हल्दी स्वच्छ पत्थर पर घिसकर सलाई से लगाए । दो-तीन दिन में लाली साफ हो जाती है ।


चवल- दो-तीन वार दिन में और रात्रि को सोते समय हल्दी के गाढे लेप से वर्षों पुराना चवल दूर हो जाता है ।
फुलवहरी- कोड, फुलवहरी, कठमाला की शिकायत हो तो आठ आठ ग्राम हल्दी का चूर्ण प्रात. व साय पानी के साथ खाए और दिन मे दो तीन वार लेप भी करें।


.विषेला डंक-पागल कुत्ते के काटने पर पचास-साठ ग्राम हल्दी पानी के साथ सेवन कराने से तथा काटे स्थान पर हल्दी का लेप करने से लाभ होता है । विच्छु, भिड तथा मक्खी इत्यादि के डंक पर भी हल्दी का लेप करना अत्यन्त हितकर है ।


बवासीर- पांच-पांच ग्राम हल्दी का चूर्ण दोनो समय बकरी के दूध की छाछ के साथ सेवन करना बवासीर का उत्तम इलाज है ।


बलगमी दमा- चार-चार ग्राम हल्दी का चूर्ण दिन में तीन बार सेवन करने से वलगमी दमा दूर हो जाता है।


जुकाम-नजला- जुकाम, कफ आदि रोगो मे हल्दी अत्यन्त हितकर सिद्ध हुई है । प्रयोग से यह प्रमाणित हुआ है कि कफ से रुके हुए गले में और वहते हुए जुकाम मे हल्दी के उपयोग से खुश्की पैदा हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप कफ का बढना रुक जाता है।
पांच-पांच ग्राम हल्दी का चूर्ण प्रात. व साय गर्म पानी से सेवन किया जाए।


गले के घाव- गले और तालु में घाव हो तो एक किलो पानी में सत्तर ग्राम वारीक पिसी हुई हल्दी मिलाकर उवालें। जब चैथाई पानी वाकी रह जाए तव छानकर इससे गरारे करें। यह इलाज प्रात व साय दोनो समय करें।
 

Blogger द्वारा संचालित.