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शनिवार, 2 जनवरी 2021

kamshakti vardhak swadisht vyanjan, jo dete hai bharpur josh \ कामशक्तिवर्धक स्वादिष्ट व्यंजन, जो देते है भरपूर जोश।

kamshakti vardhak swadisht vyanjan, jo dete hai bharpur josh 

 

 

कामशक्तिवर्धक स्वादिष्ट व्यंजन, जो देते है भरपूर जोश।

यहाँ कुछ ऐसे स्वादिष्ट व्यंजनों का वर्णन किया जा रहा है, जिन्हें घर पर ही तैयार कर सेवन किया जा सकता है। इसके सेवन से कामशक्ति बढ़ती है तथा बलवीर्य में बढ़ोत्तरी होती है। आप भी इसका सेवन कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं


सिंघाड़े का हलुआ-सामग्री- सिंघाड़े का आटा-25 ग्राम, घी-25 ग्राम, चीनी-50 ग्राम तथा दूध-250 ग्राम ।
बनाने की विधि- कड़ाही में सिंघाड़े के आटे को मन्द आंच पर घी डालकर लाल होने तक भून लें। तब अच्छी तरह से सिक जाये तो उसमें दूध डालकर पकाएं व हलुवे की तरह सेकें  गाढ़ा होने पर चीनी डालकर चलायें व तैयार होने पर नीचे उतार लें।
सेवन- इस हलुवे को रोज प्रातः नाश्ते के समय खाएं तथा ऊपर से दूध पीयें। यह स्वादिष्ट तो है ही साथ ही पौष्टिक, वीर्य को गाढ़ा करने वाला तथा पुरुषत्व को बढ़ाता है।


छुआरे का हलुआ-सामग्री- बढ़िया किस्म के छुहारे 50 ग्राम, घी 50 ग्राम, दूध 300 प, मिश्री पिसी हुई 50 ग्राम, इलायची दाना 2 नग के। 

बनाने की विधि-छुहारों के बीज निकाल लेे 250 ग्राम दूध में उबाले। और सिलबड़े पर या मिक्सी में बारीक पीस लें। मंद आंच पर कडाही में घी डालकर उसमें पिसे हए छुहारों को भूनें। लाल होने पर उनमें बाकी दूध डालकर पकाएं तथा गाढा होने पर पिसी हुई मिश्री डाल लें। इलायची के दानों का पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला ले व नीचे उतार लें। हलुवा तैयार है। 

इसका सेवन अपनी पाचन शक्ति के अनुसार 30 से 60 ग्राम तक सुबह-सुबह करें तथा ऊपर से दूध पीयें।
इसके नियमित सेवन से (विशेषकर सर्दियों के मौसम में) बलवीर्य की वृद्धि होती है. सम्भोग शक्ति बढ़ती है तथा शरीर हृष्ट-पुष्ट होता है।


उडद की खीर- सामग्री- उड़द की दाल को घी में भून लें तथा उसमें दूध डालकर जब खीर तैयार हो जाये तो उसमें चीनी डालकर नीचे उतार लें।
सेवन व गुण- इसका सेवन नित्य सुबह-सुबह नाश्ते के रूप में करें। इससे वीर्य की मात्रा बढ़ती है तथा कामशक्ति भी बढ़ती है।


सफेद मुसली की खीर-सामग्री - सफेद मूसली का चूर्ण-10 ग्राम, गाय का दूध-250 ग्राम, पिसी हुई मिश्री-20 ग्राम।
बनाने की विधि- मूसली के चूर्ण को दूध में मिलाकर औटावें । जब गाढ़ा हो जाये तब पिसी मिश्री मिलाकर नीचे उतार लें। ठण्डा होने पर सेवन करें।
इसके नियमित सेवन से वीर्य की वृद्धि, धातुक्षीणता, नपुंसकता, शीघ्रपतन इत्यादि विकार दूर होते हैं।
इसी तरह अश्वगंधा की खीर बनाई जाती है।


नारियल के लड्डु-साम्रगी- ताजा नारिलय (कच्चे) की गिरी कद्दू कस में कसी हुई-250 ग्राम, घी-50 ग्राम, मावा-125 ग्राम, चीनी-250 ग्राम तथा छोटी इलायची-10 नग।
बनाने की विधि- सबसे पहले आधे घी (25 ग्राम) में नारियल गिरी को कड़ाही में अच्छी तरह भून लें। शेष बचे हुए घी में मावा को भून लें। अब दोनों को आपस में मिला लें। चीनी की चाशनी बनायें तथा उपरोक्त सामग्री डालें। इलायची का बारीक पिसा हुआ चूर्ण भी डाल दें। इसे किसी थाली या ट्रे में जमाकर बर्फी काटें अथवा 20-20 ग्राम के लड्डु बना लें। चाहें तो चाँदी के वर्क लपेट सकते हैं।
सेवन- 1-2 लड़ या बर्फी के टुकड़े सुबह-शाम नित्य दूध के साथ सेवन करें। इसके सेवन से पुरुषत्व, बल-वीर्य वद्धि तथा धातुक्षीणता में लाभ होना है।


इसके अलावा भी आयुर्वेदीय शास्त्रों में अनेकानेक वाजीकरण योगों का उल्लेख उपलब्ध है। किंतु यहाँ पर वही योग वर्णित किये गये हैं, जिनका निर्माण सरलता पूर्वक करके लाभ प्राप्त जा सकता है । यदि तकलीफ अधिक हो या इन प्रयोगों से लाभ नहीं मिले तो किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होता है। विज्ञापनों एवं भ्रामक प्रचारकों के चंगुल में कभी नहीं पड़ना चाहिए। इनके चक्कर में पडकर पैसा एवं शरीर, दोनों को व्यर्थ हो जाता है।

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