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शनिवार, 2 जनवरी 2021

Namak se kare anek rogon ke upchar/ नमक से करें अनेक रोगों के उपचारः-

Namak se kare anek rogon ke upchar


नमक से करें अनेक रोगों के उपचारः-


शायद आपने कभी न सोचा नहीं होगा कि साधारण सा दैनिक प्रयोग में आने वाले नमक, जिसके कम और अधिक होने पर भोजन करने में मजा ही नहीं पाता, उसमें और कितने गुण छिपे हैं कि जिन्हें यदि हर समय ध्यान में रखा जाए तो डाक्टर की कितनी फीसों से बच सकते हैंः


आई लोशन (आँख की दवा)- अर्क सौंफ बढिया आठ ग्राम में शीशा नमक छ ग्राम बारीक पीसकर अच्छी तरह मिला लें और शीशी में बंद रखें, प्रात व साय दो-दो बूंदे आंखों में डालने से सुर्खी, धूंध, जाला, आँखो से पानी बहना आदि रोगो को दूर करता है।

कान-दर्द- साठ ग्राम लाहौरी नमक (सफेद) 250 ग्राम पानी में बारीक पीसकर मिलाए। जव विल्कुल घुल जाए तो इसमे 120 ग्राम तिल्ली का तेल मिलाकर धीमी आंच पर पकाएँ । जव पानी जलकर केवल तेल वच रहे तो उतारकर रख दें। दो-तीन दिन में तेल ऊपर आ जाएगा। इसे निथारकर शीशी मे रख लें। दो बूंद गुनगुना करके कान मे टपकाएं, तेज से तेज दर्द भी तुरन्त वंद होगा । कान वहने में भी लाभदायक है।


पेट के कीडें - नमक बारीक चार ग्राम प्रात. गाय की छाछ में फांक लिया जाए, तो कुछ ही दिनांे में कीड़े मर जाते हैं ।

सुरमा मोतीयाबिन्द- लाहौरी नमक चमकदार पन्द्रह ग्राम, कूजा मिश्री तीस ग्राम-दोनों को खरल में डालकर सुरमा वनाए। इसका इस्तेमाल प्रारम्भिक मोतियाबिंद में अति लाभदायक है। इसके अतिरिक्त यह सुरमा धुंध, जाला, फूला इत्यादि के लिए भी प्रति गुणकारी है ।


अमृत चूर्ण - मितली, खट्टी डकारें, पेट का भारी रहना, जिगर की कमजोरी, तिल्ली, वायु गोला, दमा-खांमी, नजला और मलेरिया के लिए यह अमृत चूर्ण बहुत उपयोगी है । इसके अतिरिक्त सिर-दर्द और दात-दर्द में तथा विषलै जीवजन्तुओं के काटने पर भी लाभदायक है-अर्थात् सिर ने लेकर पांव तक के सभी रोग विभिन्न तरीको से दूर होते है । गृहस्थियो को चाहिए कि यह अमृत-चूर्ण बनाकर घर में सुरक्षित रखें और आवश्यकता पड़ने पर घरेलू . रोगो का उपचार इसी औषधि से करके डाक्टरों और हकीमो के भारी विलो से बचें । नुस्खा यह हैः-
काला नमक तीस ग्राम, शुद्ध नौसादर पन्द्रह ग्राम, धतूरे के वीज आठ ग्राम, काली मिर्च दो ग्राम और सत पुदीना (क्रिस्टल) दो रत्ती ।


सब चीजो को बारीक पीसकर मिला लें । यदि रंग बदलना हो तो पन्द्रह ग्राम हुरमची या वाजारी कुश्ता औपधि विक्रेताआंे से सस्ते दामों में मिल जाता है, शामिल कर लें, बस औषधि तैयार है।


सेवन-विधि- प्राय यह ओपधि केवल जल के साथ ही सेवन की जाती है । परन्तु कई रोगांे में इसे विभिन्न तरीको से भी काम में लाया जाता है। दांत-दर्द में और विषैले कीडे के काटने पर इसे मलना चाहिए। आधे सिर के दर्द में इसे सूंघना चाहिए, बुखार की हालत में कब्ज दूर करके अर्क अजवाइन के साथ देने से पसीना पाकर बुखार उतर जाता है। इसी प्रकार अनुभवी और समझदार चिकित्सक इसे प्रत्येक रोग में उचित तरकीब से इस्तेमाल करवा सकता है।


आँखो के लिए- जब त्वचा में काफी तरावट नही रहती तो यह ढीली पड कर आंखो के आस-पास झुरियाँ पड जाया करती है। इसके लिए तो लम्बा इलाज है परन्तु दिन-भर काम करने के पश्चात् आँखो के गिर्द जो गढे पड जाते हैं, उनके लिए नमक का उपयोग लाभदायक है। इनकी विधि यह है कि साधारण नमक का एक चम्मच आधा गिलाम बहुत गर्म पानी में घोल लें। फिर एक बडी सी कपड़े की गद्दी बना लें और इसे नमकीन पानी मे डुबोएँ, तनिक निचोडें और आंखें बन्द करके इसको ऊपर रख लें।


इसके पश्चात् फिर इमी प्रकार दुवोकर, निचोड कर, आंखों पर रखें। तत्पश्चात् कोई ठण्डी क्रीम आँखो के इर्द-गिर्द मिलें । नाक के सिरे से उंगलियां चलाकर हल्के-हल्के आँखो के पपोटो पर लाए और फिर वहाँ से नथुने से तनिक ऊपर घुमाकर लाएं। क्रीम को अब पोंछ दें। हमेशा ऊपर के पर्दे पर हल्की-सी क्रीम लगाया करें ताकि दीर्घायु मंे अंाखो के इर्दगिर्द झुरियाँ न पढ़ें और त्वचा में कालिमा ना आयें, क्योंकि यह दोनांे लक्षण बडी उम्र के है।

विच्छू काटे का इलाज- विच्छू के डक मारने का स्थान तनिक कठिनाई से मिलता है। विशेषकर रात्रि के समय विल्कुल पता नही लग सकता । और जब तक ठीक डक के स्थान पर दवाई न लगे तव तक अच्छी मे अच्छी दवाई भी लाभ नहीं करती । यहाँ एक ऐसी दवाई दी जाती है जिसे केवल प्रांखो मे डालने से एक सैकड मे विप उतर जाता है, और मजे की बात यह कि इस पर कुछ खर्च भी नहीं होता । लाहौरी नमक पन्द्रह ग्राम और स्वच्छ जल पचहत्तर ग्राम मिलाकर रख लें, बस दवाई तैयार है। जिसे विच्छू काटे उसकी आँखो मे सलाई से लगाएं। जितना भी विप चढा होगा तुरन्त उतरना शुरू होगा और कुछ मिनटो के भीतर ही डक के स्थान पर भी दर्द न रहेगा।


सिर-दर्द- जिस व्यक्ति के सिर मे दर्द हो उसे एक चुटकी नमक जबान पर लेना चाहिए और दस मिनट पश्चात् एक गिलास ठण्डा पानी पीना चाहिए, सिर दर्द दूर हो जाएगा।


नजला-जुकाम- सफेद नमक शहद मंे गोध कर और कपडे मे लपेट कर तथा ऊपर मिट्टी लगाकर आग पर रखें। मिट्टी सुर्ख हो जाए तो नमक को अन्दर से निकाल कर पीस लें। एक ग्राम रोजाना प्रात या भोजन के पश्चात् पानी से सेवन करना जुकाम-नजला, वायु और जोडो के दर्द के लिए लाभदायक है।


नमक और चीनी उपचार


सेंधा नमक एक भाग, देशी चीनी चार भाग-दोनो वारीक पिसे हुए तीन-तीन ग्राम सुबह दोपहर और शाम गर्म पानी के साथ सेवन करें मलेरिया या मौसमी बुखार पसीना पाकर उतर जाता है और फिर नहीं चढता। 


गर्म दूध के नाथ प्रात व सायं तीन-तीन ग्राम खिलाएं । नजले और जुकाम को आराम देता है।


.खाना खाने से दस मिनट पहले या दस मिनट पश्चात् ताजा पानी के साथ गर्मियों के मौसम मे, और गर्म पानी के साथ तीन ग्राम सर्दियो में सेवन करना बदहजमी और भूख की कमी को दूर करता है ।


सौ-सौ ग्राम गर्म पानी मे तीन-तीन ग्राम मिलाकर दिन में चार बार चार-चार घण्टे के पश्चात् पिलाना दमें में हितकर है।


पांच-पांच ग्राम प्रात, दोपहर और शाम गर्म पानी के साथ खिलाना वायुगोला को दूर करता है । इसी प्रकार सेवन करने से अफारा और पेट का गडगडाना भी दूर हो जाता है ।


गर्म दूध या ताजा पानी के साथ प्रात व सायं तीन-तीन ग्राम खिलाने से पसीने का अधिक आना दूर हो जाता है ।
बकरी के गर्म दूध के साथ चार-चार घ्ंाटे के पश्चात् चार-चार ग्राम खिलाना आरम्भिक तपेदिक मे लाभदायक है।
 

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