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मंगलवार, 19 जनवरी 2021

Sambandh shamta badhaye Shatavari / संबंध क्षमता बढाये शतावरी

Sambandh shamta badhaye Shatavari

 

 

संबंध क्षमता बढाये शतावरी


 पुरूषों की संबंध बनाने की क्षमता और स्त्रियों के शरीर को पुष्ट करने वाली औषधी है शतावरी।
आयुर्वेद में शतावरी का अर्थ है - जिसके सौ पति हो। नाम के अनुरूप ही इसका उपयोग करने वालों को यह भरपूर शक्ति प्रदान करती है। जिस तरह पुरूषों के लिये अश्वगंधा है। उसी तरह स्त्रियों के लिये शतावरी का महत्व है। हालांकि इन दोनों ही औषधियों के अच्छे प्रभाव स्त्री व पुरूष दोनों पर ही पडते है। इसके अतिरिक्त यह हर उम्र की औरतों के लिये लाभदायक है। इसमें बहुत सारे फाइटो हार्मोन होते है। जो कि स्त्रियों के शरीर में स्थित हार्मोन के समान होते है। 


शतावरी एक औषधिय पौधा है, जिसकी जडों को अमृत का स्थान दिया गया है। शतावरी स्वाद में कडवी होती है। लेकिन पोषक तत्वों से भरी होती है। शतावरी को शतावरी, शतावर, सतमुली, शटमूली, सरनाई, आदि के नाम से भी जाना जाता है। यौन संबंधी उपयोग के अलावा इससे शुगर, वजन घटना, तथा त्वचारोग में भी आराम मिलता है। इसमें बहुत कम कैलोरी होती है। एक कप शतावरी में केवल 20 केलोरीज होती है। इसका अर्थ है कि आप इसका सेवन करते समय कैलोरी की चिंता करना भूल जाइये। इसमें 93 प्रतिशत पानी होता हे। इसमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है। ज्यादा फाइबर खाने से वजन कम होता है। 


शतावरी के यौन संबंधी गुणः-

पुरूषों में संभोग इच्छा को जागृत करती है। नपुंसकता को समाप्त करती है। महिलाओं के स्तन का आकार बढाती है तथा छाती की मांसपेशियां बढाती है। संभोग जीवन का अनुभव आनंददायक बनाती है। शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा को बढाती है। मर्दाना ताकत बढाती है। स्त्रियों के प्रजनन अंगों के लिये एक सुदृढ औषधी है। यह प्रजनन अंगों के लगभग सभी विकारों को दूर करती है। यह एस्ट्रोजन हार्मोन के उत्पादन को बढाती है तथा मासिक चक्र को नियमित करती है। पुरूषों में शुक्राणुओं की संख्या बढाती है। शुक्राणुओं की गुणवत्ता और गतिशीलता में सुधार लाती है। यौन स्वास्थ्य समस्याओं में प्रभाव के कारण पैदा हुये बांझपन को दूर करती है। गर्भवती औरतों के लिये उत्तम औषधी है। गर्भ को पोषित करती है। गर्भवती औरत के अंगों को गर्भ धारण के लिये तैयार करती है। गर्भपात से बचाती है। मां के दूध को बढाती है। उसकी गुणवत्ता को बढाती है। शतावरी औरतों में मासिक धर्म चक्र के दौरान बढे हुये वजन को कम करती है। 


उपयोग में सावधानीः-

यदि अन्य रोगों की कोई दवाएं चल रही हो तो आपको शतावरी नहीं लेनी चाहिये। क्योंकि यह उन दवाओं को काम नहीं करने देगी। अधिक मात्रा में शतावरी का सेवन करने से दिल व गुर्दा रोग होने की संभावना हो जाती है। शतावरी में कार्बोहाइडेªट होता है। जिसे रेफिनोज कहते है। इसे पचाने के लिये पेट में इसका खमीर बनता है। इस क्रिया के दौरान गैस बनती है। जो शरीर से बाहर निकलती है। गर्भावस्था में सामान्य से अधिक मात्रा में शतावरी खाना हानिकारक हो सकता है। जिन्हें प्याज या उसके किसी प्रकार से संक्रमण है, उन्हें शतावरी से भी हानि हो सकती है। इस औषधी में प्यूरीन नामक पदार्थ पाया जाता है। शरीर में प्यूरीन, यूरिक एसिड बनाने के लिये टूटता है। जिससे शरीर में प्यूरीन अधिक हो सकता है। जिन लोगों को यूरिक एसिड की समस्या है, जैसे किडनी में पथरी, या गाउट, उन्हें शतावरी नहीं खानी चाहिये।
 

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