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बुधवार, 10 फ़रवरी 2021

Mard ke chhune se aurat ke badan me hoti hai esi gudgudi / मर्द के छूने से औरत के बदन में होती है ऐसी गुदगुदी

 Mard ke chhune se aurat ke badan me hoti hai esi gudgudi

 

मर्द के छूने से औरत के बदन में होती है ऐसी गुदगुदी:-


ऽ    मर्द जब संबंध बनाने के लिये उत्तेजित हो और औरत को पकडकर खींच कर अपनी बाहों में भरकर अपने सीने से लगा लेता है तो इससे औरत का दिल जोरों से धडकने लगता है। 

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ऽ    अपने सीने से लगाकर अपने होंठ, औरत के होंठों पर रखने से औरत के बदन में आश्चर्यजनक रोमांच पैदा हो जाता है। उस रोमांच की अनुभूति करने के लिये वह अपनी आंखें बंद कर लेती है और अपना सिर मर्द की छाती पर टिका देती है। 


ऽ    औरत के गालों पर चुंबन देने से तथा उसके बालों को सहलाने से वह मर्द के पे्रम सागर में डूबने लगती है। उसकी तरफ सम्मोहित होकर उसके नियंत्रण में आने लगती है। 

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ऽ    जब मर्द का हाथ उसके वक्षस्थल पर पहुंचता है तो उस समय उसे होश आता है। और वह उसके नियंत्रण से थोडा बाहर आती है। वक्षस्थल के आगे वाले हिस्से पर मर्द का हाथ लगते ही औरत के पूरे शरीर में बिजली का करंट सा दौडता है। उपर से लेकर नीचे तक औरत झनझना जाती है। उसका दिल तेजी से धडकने लगता है। श्वास और नसें तेजी से चलने लगती है। शरीर भटटी की तरह तपने लगता है। चेहरा लाल हो जाता हैं और वह मर्द से चिपक जाती है। 

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ऽ    थोडी देर औरत के कोमल और भरे भरे वक्ष को सहलाने के बाद उसे अपने शरीर से चिपकाये हुये धीरे धीरे उसके सारे शरीर को अपने हाथ से उसके पेट, कमर,  जांघें,  आदि को सहलाने, मसलने, चुंबन देने से, गुप्त द्वार को अंगुलियों से हिलाने, सहलाने से औरत का शरीर पिघलने लगता है और कांपनें लगता है। 


ऽ    थोडी देर  गुप्त द्वारों पर अंगुलियों से हल्की हल्की मालिश करने के बाद थोडा जोर लगाकर रगडने से औरत अपनी शर्म, संकोच और झिझक को भूलकर अनियंत्रित हो जाती है। और मर्द से चिपक जाती है मानो जैसे वह उसके शरीर में ही प्रवेश करना चाहती है। मर्द को कस कर पकड लेती है। तथा अपने कोमल, गुलाबी होंठों से मर्द के गाल, गर्दन, होंठ आदि को चूमने लगती है। साथ ही अपने होठों को आदमी की छाती पर रगडने लगती है। इस तरह प्यार करने से उसकी सांसें तेजी से चलने लगती हैं। वह अपनी टांगों से आदमी की टांगों, जांघों  को दबाने लगती है। 


ऽ    औरत अधिक उत्तेजित होने पर अथवा उसी मर्द के साथ पहले संबंध बनाये हुये होने पर अर्थात मर्द से खुले हुये होने पर वह उसके गुप्त अंग को अपने हाथ में पकडकर खेलने लगती है, उसे चूमने लगती है या अपने मुख में लेकर चूसने लगती है। इस क्रिया से औरत और मर्द दोनों को ही शारीरिक संतुष्टि के साथ मानसिक संतुष्टि भी मिलती है। दोनों की आत्मा तृप्त हो जाती है। दोनों के चेहरे पर संतुष्टि के भाव झलकने लगते है।
ऽ    उसकी यह क्रिया मर्द को संकेत होती है कि वह अपने हथियार को उसकी गुफा में प्रवेश कराकर जल्द से जल्द क्रिया आरंभ करें। 


ऽ    क्रिया में संतुष्टि मिलने पर मर्द के लिये औरत के मन में और भी अधिक प्रेम और सम्मान बढ जाता है।
 

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